माँ से मिलने जब NRI बेटा घर आया तो घर पर मिला सिर्फ कंकाल !! जानिए पूरा सच !!

हम सब लोग सफलता पाने के लिए बहुत कुछ गवा देते हैं, आजकल हम पैसों के लिए अपनों को दूर कर देते हैं। हम भूल जाते हैं कि उन लोगों ने आपके लिए क्या-क्या किया है और अपनी खुशी के बारे में ही सोचते हैं। हमारे माता पिता हमे कुछ बनाने के लिए अपनी सारी ज़िन्दगी लगा देते हैं और हम उन्हें बुढ़ापे में संभाल भी नहीं पाते। यह लेख भी एक ऐसे ही लड़के के बारे में है जो सफलता के लिए अपने माता पिता को ही भूल गया। जब वो लड़का अपनी माँ से कई साल बाद मिलने

हम सब लोग सफलता पाने के लिए बहुत कुछ गवा देते हैं, आजकल हम पैसों के लिए अपनों को दूर कर देते हैं। हम भूल जाते हैं कि उन लोगों ने आपके लिए क्या-क्या किया है और अपनी खुशी के बारे में ही सोचते हैं। हमारे माता पिता हमे कुछ बनाने के लिए अपनी सारी ज़िन्दगी लगा देते हैं और हम उन्हें बुढ़ापे में संभाल भी नहीं पाते।

यह लेख भी एक ऐसे ही लड़के के बारे में है जो सफलता के लिए अपने माता पिता को ही भूल गया। जब वो लड़का अपनी माँ से कई साल बाद मिलने घर आया तो उसे सिर्फ वहां एक कंकाल पड़ा हुआ मिला। वो कंकाल उसकी माँ का ही था, तब उसे एहसास हुआ होगा कि वह क्या गलत कर रहा था इतने सालों से।

केस के बारे में पूरी जानकारी :

यह केस मुंबई का है, ऋतुराज नाम का एक इंडियन सॉफ्टवेयर इंजिनेयर कई सालों से US में रह रहा था। उसे US में रहते हुए लगभग 20 साल होगये थे। उसके माता पिता यहां ही मुंबई में रह रहे थे परन्तु उसके पिता कि मृत्य 2013 में ही हो चुकी थी और उसकी माँ अकेली घर में रह रही थी। अगर आप कभी एक दिन के लिए भी अकेले हो जाओ तो आपको कितना दुख होता है, तो सोचो उस माँ पर क्या गुज़री होगी।

1 साल ने नहीं कर रहा था बात :

ऋतुराज अपनी माँ से 1 साल से बात नहीं कर रहा था। आखरी बार उनकी बात पिछले साल अप्रैल में हुई थी, आखरी बार जब बात हुई थी तो उसकी माँ ने उसे बोला था कि में अकेली नहीं रह सकती, तू घर जल्दी आजा।
पर बेटे ने माना कर दिया। उसके बाद उन दोनों की कभी भी बात नहीं हुई, किसको पता था कि यह माँ बेटे की आखिरी बात होगी।

एक साल बाद आया घर पर मिलने :

जब एक साल बाद ऋतुराज अपनी माँ से मिलने घर पर आया तो उसने देखा कि घर का दरवाज़ा लॉक है और कोई खोल भी नहीं रहा है। उसने बहुत देर तक घर का दरवाज़ा खतकाया पर किसी ने भी जवाब नहीं दिया, फिर वो बाज़ार चला गया और उसने वहां एक चाबी बनवाने वाले से, अपनी माँ के घर की चाबी बनवाई। जैसे ही उसने दरवाज़ा खोला, उसके होश उड़ गए और वो रो पड़ा।

बिस्तरे पर उसकी 63 साल की बूढ़ी माँ का सिर्फ कंकाल पड़ा था। उसकी माँ इस दुनिया से जा चुकी थी, दुःख की बात तो यह है कि उसकी माँ को ऐसी मौत देखनी पड़ी। उनके आखिरी समय पर उनके साथ कोई भी नहीं था, आप इसी बात से अंदाज़ा लगा सकते है कि वो कितनी अकेली थी कि उनको साल भार किसी ने भी नहीं पूछा कि वो कहाँ गयी।

 

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